अध्याय 119

कैटनिस के शब्द बेरहम थे।

उसकी आँखों में छिपा नहीं रहने वाला उपहास और खुली घृणा ने सेड्रिक के मुँह से कोई भी सफ़ाई निकलने ही नहीं दी।

उसके ग़ुस्से से तमतमाए चेहरे की ओर एक बार भी देखे बिना वह मुड़ी, कमरे के कोने में अपने वर्कस्टेशन तक गई, कुर्सी खींची और बैठ गई।

सेड्रिक वहीं जड़ होकर खड़ा रह गया—स...

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